Sunday, April 18, 2021
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    बंगाल चुनाव 2021: इस बार आसान नहीं है ममता बनर्जी की राह जानें 2016 के चुनाव से कितने अलग हैं हालात

    ममता बनर्जी को यह भलीभांति मालूम है कि बंगाल में सत्ता का ऊँट किस करवट बैठेगा ,2011 के चुनाव को उदाहरण मानकर चलें तो जब वामों  ने सत्ता गँवाई थी  तब मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य अपनी सीट भी नहीं बचा पाए थे,

    इतिहास गवाह है : बंगाल की जनता ने जिस पर भरोसा किया दिल खोल कर किया जिसको भी सत्ता की कमान सौंपी लंबी अवधि के लिए सौंपी, हमेशा से बंगाल का सियासी मिजाज बड़ा ही स्थिर रहा है तभी तो वामदलों ने 34 साल तक बंगाल पर राज्य किया, और अब टीएमसी ने भी सत्ता के 10 वर्ष पूरे कर लिए, पूर्व चुनावी परिदृश्य को देखते हुए टीएमसी जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है और वह, कठिन भी नहीं लगता लेकिन दूसरी तरफ सत्ताधारी ममता बनर्जी के लिए 2021 की चुनावी राह आसान भी नजर नहीं आ रही ।

    इस बार 2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव से नतीजे काफी अलग दिख रहे हैं इस बार टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अभिमन्यु की तरह  चक्रव्यूह में घिरी हुई हैं  हालात की गंभीरता का अंदाजा उनको भलीभांति है, ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते वर्चस्व को नहीं भुना पा रही, बीजेपी को नीचा दिखाने के लिए ममता बनर्जी कई अशोभनीय और भड़काऊ बातें कही हैं, दीदी को यह भलीभांति मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी को अगर हम नीचा दिखाने में कामयाब हो गए तो हमारी जीत सुनिश्चित है, मौके को देखते हुए ममता दीदी ने दूसरे चरण के मतदान से 1 दिन पहले 15 नेताओं को चिट्ठी लिखकर बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील की दूसरे चरण में 30 सीटों पर मतदान होना है लेकिन ममता दीदी ने प्रचार के अंतिम दिनों में नंदीग्राम में डेरा डाल दिया है जहां से वह खुद चुनाव मैदान में हैं ।

    चुनाव से काफी अलग होगा यह चुनाव

    पूर्व चुनाव की बात करें तो विधानसभा चुनाव में टीएमसी के सामने वामदलों और कांग्रेस  की सीधी टक्कर थी वामों का  कैडर बिखरा हुआ था कुछ इलाकों को छोड़ दें  तो  वामों  को लड़ाई में भी नहीं माना जा रहा था, चुनाव  विशेषज्ञों की बात माने तो तब विपक्ष शुन्य के हालात पर था ,तब tmc व् mamata  के सामने कोई भी चुनौती नहीं थी ममता बनर्जी का विजय रथ बगैर किसी रूकावट के बंगाल के हर इलाके से निर्विघ्नं कोलकाता तक पहुंचा और ममता बनर्जी लगातार दूसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनी आपको अवगत कराते चलें कि टीएमसी ने 294 सदस्यीय विधानसभा की  211 सीटें जीती थी, इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग है 2016 के चुनाव में महज 3 विधानसभा सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी इस बार ममता बनर्जी की कड़ी प्रतिद्वंदी है वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में महज एक सीट जीतने वाली बीजेपी ने 2014 में 2 सीटें जीती और 2019 के लोकसभा चुनाव चुनाव में 40 में से 18 सीटें जीतकर टीएमसी को यह संकेत दे दिए कि बंगाल की राजनीति में वामों और कांग्रेस  के कमजोर होने से खाली हुई जगह भरने के लिए हम  तत्पर हैं  ।

    टीएमसी से नेताओं के पलायन से भी ममता को हो सकती है दिक्कत

    ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द पार्टी से नेताओं का पलायन रहा है ममता का दाया हाथ माने जाने वाले   शुभेंदु इस बार खुद नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी हैं, और मुकुल राय दिनेश त्रिवेदी जैसे वरिष्ठ टीएमसी नेता भी ममता दीदी का साथ छोड़कर बीजेपी में जा चुके हैं, अमित शाह ने मेदिनीपुर की रैली में कहा था कि चुनाव आते आते ममता बनर्जी अकेली रह जाएंगी उनके साथ कोई नहीं खड़ा होगा |

    ममता बनर्जी ने प्रचार प्रसार का जिम्मा अपने कंधे पर संभाल रखा है जबकि उनके समक्ष बीजेपी ने एक तरफ से पूरी केंद्र सरकार को उतार रखा है गृह मंत्री अमित शाह के कठिन परिश्रम और चुनावी रणनीति को देखते हुए विशेषज्ञ तो यही कहते हैं कि इस बार के चुनाव में ममता बनर्जी को बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल रही है ।

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